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अपनी जमीन चकों में कराओ…इसके लिए खुद आगे आओ

अपनी जमीन चकों में कराओ…इसके लिए खुद आगे आओ !!! उख० भूलेख के इस link पर जाओ…http://bhulekh.uk.gov.in/public/public_ror/Public_ROR.jspमित्रों,हम सब चाहते हैं कि हमारी जमीन तलाऊ तथा उपराऊ जैसी भी है वो चकों में हो. इसके लिए पहले हमें अपनी कुल जमीन मालूम करनी होगी जो हमारे परिवारों के सांथ हिस्सेदारियों वाले गोलखातों में है.- अपनी जमीन निकालने के लिए आपको अपने परिवार के सभी हिस्सेदारों की जमीन भी अलग-अलग निकालनी होगी.- इसके लिए आपको अपने बुजुर्गों से पूछ कर अपनी बंसावली का ज्ञान भी होना होगा.- पटवारी-तहसील तथा जिला रिकार्डों तक भी जाना होगा.- अच्छा होगा कि इसके लिए गाँव में एक टीम बनाकर काम किया जाय.- 1960-62 बंदोबस्ती रिकार्ड़ोंनुसार अपने अपने दादा-परदादा की किस-किस खाते में कितनी-कितनी जमीन है ये आप खुद पता कर सकते है या आपका पटवारी भी बता देगा.- जब अपने दादा-परदादा की कुल जमीन का पता चल जाय तो उनके नाम का बड़ा चक बनाइए और उसमें आपकी जमीन कितनी होती है उसको पुन: एक छोटे चक में कर लीजिये.- हमने अपने 4 (चार) मुख्य परिवारों की जमीन कैसे निकाली है देखिये.- इन 4 (चार) मुख्य परिवारों के अलग-अलग चकों में किस-किस खाते के कौन-कौन खेत हो सकते हैं, ये भी हमने निकाल कर रखा है, इसे भी ठीक से देखिये और समझिये भी.- हमारे ग्रामप्रधान ने भी चकबंदी करने के लिए प्रस्ताव दिया है.- अभी हम सुप्रीमकोर्ट के फैसले के अनुसार हमारी जमीन की चकबंदी कराने के लिए जिलाधिकारी अल्मोड़ा को पत्र भेज रहे हैं.- हमारे पहाड़ में अपनी जमीन एक सांथ चकों में कराने का यही आसान तरीका है.- जमीन चकों में होने से अपने गाँव की जलवायुनुसार सेव, अखरोट, कीवी आदि के पौंधों का मुख्य बगीचा बनाइए जो 40-50-60 सालों के लिए एक बार तैयार कर देने से हो जाते हैं.- अब इन फल-पौंधों की छाया में शब्जियाँ, दालें, मसाले, औषधीय पौंधे आदि उगाते हुए एक-दो गाय, 4-5 मधुमक्खियों के बक्से आदि-आदि से प्रति 10 नाली जमीन वाले मजदूरों का खर्चा आदि निकाल कर हर साल कम से कम 5-6 लाख रुपयों की बचत करने सकेंगे !!! यानि प्रतिमांह 40-50 हजार रूपये !- एक नाली जमीन से प्रतिमांह 4 – 5 हजार रूपये !- इतना फायदा किसी भी बिजनेस में नहीं है.- चकबंदी नहीं होने से हम सब को ये प्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान तो हो ही रहे हैं इसके अलावा खेत बंजड होते जा रहे हैं, उनकी उर्वरक क्षमता घट रही है, उनमें झाड़ियाँ-पेड़ उगने से खूंखार जंगली जानवरों के अड्डे हो रहे हैं, अब तो घर-आंगन में भी लोग सुरक्षित नहीं हैं. इन सब पर भी जरा सोच के देखिये.विशेष :- हमारी बंसावली, 4 (चार) मुख्य परिवारों की अलग-अलग कुल भूमि तथा इनके अपने-अपने चकों में किस-किस खाते के कौन-कौन खेत हो सकते हैं, ये भी हमने निकाल कर रखा है, इन सब को ठीक से देखिये, समझिये तथा अपने-अपने गाँवों में भी लग जाइये. धन्यवाद.

केवला नन्द “फकीर”

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