About

“खुदेड़ डाँडी काँठी” की नींव रखी गई लगभग सन 2012 में… तब “खुदेड़ डाँडी काँठी” केवल एक सोच थी जिसने जन्म लिया इस संस्था के संस्थापक श्री “अनोप सिंह नेगी” (खुदेड़) जी के मन मष्तिष्क में… धीरे धीरे इन तीन शब्दो को पहचान मिली 2014 में, जब हमने यूट्यूब के माध्यम से उत्तराखण्डी गीतों का प्रसारण शुरू किया। जिसमें संस्कृति व सभ्यता प्रेमियों का काफी सहयोग व आशीर्वाद प्राप्त हुआ।
       इसी से प्रेरित होकर हमने अन्य संस्थाओं के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम करने शुरू किए उसमें भी सभी का भरपूर सहयोग प्राप्त हुआ व हमें इस संस्था को प्रगति देने में मुख्य भूमिका निभाई।

        धीरे धीरे उत्तराखण्ड के बड़े बड़े मंचो के साथ मिलकर कार्य किया। इनमे उत्तराखण्ड एकता मंच, गरीब क्रांति अभियान उत्तराखण्ड तथा भूम्याल के द्वारा आयोजित होने वाले तीन दिवसीय कार्यक्रम रिखणीखाल महोत्सव के लिए गीत दिए।
        खुदेड़ डाँडी काँठी उत्तराखंड की सभ्यता संस्कृति एवं विरासत को बचाने व सहेजे रखने के लिए प्रयासरत एवं समर्पित मंच है, जो कि लंबे समय से किसी न किसी क्षेत्र में किसी न किसी रूप में अपना योगदान देता आ रहा है।
      चाहे वह उत्तराखंड की लोक भाषा के लोकगीत हो या कविताएं, सभी को प्रोत्साहन एवं बढ़ावा यह मंच हमेशा से ही देता आ रहा है, साथ ही कई सफल कार्यक्रमों के आयोजन के लिए भी जाना व पहचाना जाता है।
        इसके अलावा भी उत्तराखंड के पारंपरिक परिधानों व रीति रिवाजों का प्रचार-प्रसार करने और आम जन तक पहुंचाने का कार्य खुदेड़ डाँडी काँठी द्वारा किया जाता रहा है। तथा उत्तराखंड के पारंपरिक खाद्यान्नों, मिठाइयों, पकवानों तथा फलों आदि को उत्तराखंड के विभिन्न हिस्सों में साथ ही देश की राजधानी दिल्ली में भी आमजनों तक सुलभ करवाने, तथा उनका महत्व व लाभ सभी लोगों तक पहुंचाने का कार्य किया है।
       इतना ही नहीं उत्तराखंड में पैदा होने वाले तथा उत्तराखंड की जमीन से मिलने वाले प्राकृतिक संपदाओं जैसे जड़ी बूटियों आदि के महत्व एवं लाभों का ज्ञान आम जन तक पहुंचाने का कार्य हमारी संस्था कर रही है।
        26 नवम्बर 2017 को एक बहुत ही महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए हमारी संस्था द्वारा दिल्ली में एक बहुत ही भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया जो उम्मीद के अनुरूप ही सफल भी हुआ व संस्था को गति देने में सहायक सिद्ध हुआ।
        उत्तराखंड का एक बहुत बड़ा जनसमूह खुदेड़ डाँडी काँठी से किसी न किसी रूप में जुड़ चुका है इसी कड़ी में हम आपका भी बहुत-बहुत स्वागत करते हैं आशा है सभी लोग हमसे यूं ही जुड़ते रहेंगे।
     धन्यवाद
     – खुदेड़ डाँडी काँठी परिवार

 

 

 

 

“Khuded Dandi Kanthi” was laid on the foundation of about 2012. Then, “Khuded Dandi Kanthi” was only one thought which was born in the mind of the founder of this organization Mr. “Anop Singh Negi” (Khuded) ji… slowly these three words were recognized in 2014, when we started broadcasting Uttarkhandi songs through Youtube. In which we recieved great support and blessings of culture and civilization lovers.
       Inspired by this, we started to perform cultural programs for other institutions and also got a lot of support from everyone and played a major role in making this institution progress.
        Slowly worked closely with the big forums of Uttarakhand. We offered songs to Uttrakhand Ekta Manch, Garib Kranti Abhiyan Uttarakhand and the three-day program of Rikhanilal Mahotsav organized by Bhoomyal.
        Khuded Dandi Kanthi is a successful and dedicated platform aimed at saving and saving the civilization culture and heritage of Uttarakhand which has been contributing in some form in some form for a long time.
      Whether it is folklore or poetry of folk language of Uttarakhand, it is always promoting and encouraging everyone, and it is also for known and recognized for organizing many successful programs.
        Apart from this, the task of propagating traditional clothes and customs of Uttarakhand and making it available to the masses has been done by khuded Dandi Kanthi. And the traditional foodgrains of Uttarakhand, sweets, utensils and fruits etc. have been done in various parts of Uttarakhand, as well as making them accessible to the masses in the national capital of Delhi, and to bring their importance and benefits to all the people.
         Not only this, our institution is working to bring the knowledge of the importance and benefits of the natural resources like the herbs that are being grown in the lands of Uttarakhand.
        Taking a very important step on November 26, 2017, our organization organized a very grand poetry assembly (Kavi Sammelan) in Delhi which succeeded as expected and proved to be helpful in mobilizing the institution.
        A huge crowd of Uttarakhand has been added to Khuded Dandi Kanthi in some form orgies. In this episode we welcome you very much. Hope all people will continue to join us.
     Thank you
      -Team “Khuded Dandi Kanthi”